: खेती विरासत मिश्न साकार कर रहा है अपने आँगन में अपनी खेती का सपना  


 लुधियाना: 25 अप्रैल 2015:(रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन): 

 एक पुरानी कहावत है-जैसा अन्न वैसा मन लेकिन जो अन्न हमें मिल रहा है वह तन और मन दोनों के लिए विषाक्त है। जीने के लिए मिल रहा आवश्यक अन्न भी प्रदूषित, जल भी प्रदूषित हवा भी ज़हरीली। जीने के मौलिक अधिकारों से हम लगातार वंचित हो रहे हैं। बिमारियों लगाकर जीना हमारी नियति बना दी गयी है। विकास के दावों की हकीकत का खोखलापन आम जन साधारण के जीवन  को एक एक नज़र देखते स्पष्ट जाता है। इस स... ...  #Promote the Blog www.punjabscreen.blogspot.com 
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